
New Delhi: 1984 सिख दंगों के दोषी और तिहाड़ जेल में बंद कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार की मौत के बाद कांग्रेस नेताओं के बयानों से सिख समुदाय में भारी आक्रोश है। गुस्साए सिख नेताओं और पीड़ित परिवारों ने शनिवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सरकारी आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारी राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर पहुंचे और कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान गुस्साए लोगों ने पुतला भी जलाया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके में भारी बैरिकेडिंग कर दी थी।
क्यों भड़का सिख समाज?
दरअसल गुरुवार को 80 वर्षीय सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन हो गया था। वह दिसंबर 2018 से 1984 दंगों के दो मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।उनके निधन के बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसे “कभी न पूरी होने वाली क्षति” बताया, वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि “पार्टी के लिए यह बड़ी क्षति है, उन्होंने गरीबों के लिए बहुत काम किया था।”कांग्रेस नेताओं द्वारा सिख दंगों के दोषी को इस तरह महिमामंडित करने से सिख समाज आहत है।
राहुल गांधी से माफी की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कलका और महासचिव जगदीप सिंह कहलोन ने किया।कलका ने कहा, “कांग्रेस को साफ करना होगा कि क्या 1984 के गुनहगार उनके हीरो हैं? राहुल गांधी को बताना होगा कि क्या सज्जन कुमार उनके आदर्श हैं? उनके नेताओं के बयानों ने 42 साल बाद हमारे जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। हमारी भावनाओं को ठेस पहुंची है, कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।”
कौन थे सज्जन कुमार और क्या था मामला ?
सज्जन कुमार पर 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के राज नगर और सरस्वती विहार इलाके में सिखों की हत्या और गुरुद्वारे को जलाने का आरोप था।इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों में दिल्ली में 2700 और देशभर में 3500 से ज्यादा सिखों की मौत हुई थी।सज्जन कुमार के खिलाफ कुल 4 केस चले:राज नगर केस: 5 सिखों की हत्या का मामला। 2013 में निचली अदालत ने बरी किया, लेकिन 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।सरस्वती विहार केस: पिता-पुत्र की हत्या। इसमें फरवरी 2025 में दूसरी बार उम्रकैद की सजा मिली।सुल्तानपुरी और जनकपुरी-विकासपुरी केस: इन दोनों मामलों में कोर्ट ने उन्हें 2023 और जनवरी 2026 में बरी कर दिया था।सज्जन कुमार ने 31 दिसंबर 2018 को सरेंडर किया था और वह 7 साल 8 महीने से जेल में थे।
